“प्यार के दो फूल” लुनीता मैत्रेयी
एक बिम्ब के रूप में परिभाषित होगी, ऐसा मैं समझती हूँ।
जैसे हम सभी जानते हैं कि लेखक की पहचान उसकी शैली और भावधारा से होती है।
कवि की कविताओं के माध्यम से आप उनकी सोच और प्रकृति को जान सकते हैं।
मैंने वंदनीय लुनीता मैत्रेयी जी को उनकी शैली से ही पहचाना है और पाया है कि उनमें लेखनी के लिए सूक्ष्म दृष्टिकोण को साध कर गंभीरता से बात कहने की क्षमता है।
वंदनीय लुनीता जी साहित्य में एक सशक्त हस्ताक्षर हैं।
आप जितनी सरलता से नारी के मर्म को अपनी रचनाओं में उतारती हैं, उतनी ही सशक्तता से जीवन के सागर में अपने कथ्य को गहराई से स्थापित करती हैं।
आपकी पुस्तक निश्चित ही पाठक–समाज को प्रभावित करेगी और उन्हें विशिष्ट पहचान देगी।
“प्यार के दो फूल” नारी–साहित्य में खिले चमन के साथ प्रेम–अर्थ में रसमय रूप लेकर मीठी महक से सुवासित रहेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।






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