Letters to his beloved on the days"Sangharsh KI yadein" by Radha Goyal
आज के समय में पत्र लेखन की परंपरा विलुप्त हो गई है।
आजकल हमें जब भी किसी की याद आती है तो हम तुरंत मोबाइल से कॉल करके बातें कर लेते हैं।
लेकिन एक समय था जब हम पत्र लिखा करते थे—और कई–कई दिनों तक पत्रों के उत्तर की प्रतीक्षा करते थे।
अपने से दूर रहने वाले—चाहे वे माता–पिता हों, भाई–बहन हों, पति–पत्नी हों, रिश्तेदार हों, मित्र हों या परिचित—सब तक संवाद पहुँचाने के लिए पत्र ही एक मात्र साधन थे।
राधा जी मेरी व्हाट्सऐप ग्रुप ‘साहित्य एतज़ा’ की सदस्य हैं।
वे एक सक्रिय सदस्य हैं और सभी सृजनकर्ता मित्रों की रचनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देती हैं तथा अपने विचार साझा करती हैं।
एक दिन मुझे उनका एक संदेश मिला, जिसमें उन्होंने लिखा था—
“एतज़ा जी, मैं एक पत्र आपको भेज रही हूँ। यह पत्र मैंने अपने पति को उस समय लिखा था जब वे मुझसे दूर रहते थे। यदि आपको उचित लगे तो मैं इस पत्र को समूह में प्रकाशित कर दूँ।”
मैंने वह पत्र पढ़ा—पत्र बहुत अच्छा लगा। भावपूर्ण पत्र—ऐसा लगा जैसे प्रत्यक्ष उन्हीं पलों तक पहुँचा दिया हो राधा जी ने।
मैंने राधा जी से कहा कि वे पत्र को समूह में प्रकाशित करें।
राधा जी ने बताया कि उनके पास ऐसे सौ से भी अधिक पत्र हैं जो उन्होंने अपने पति को लिखे थे।
मुझे आश्चर्य हुआ कि इतने सारे पत्र राधा जी ने संजोकर रखे हैं।
फिर मुझे उनके और भी पत्र पढ़ने का अवसर मिला।
पत्रों को पढ़कर मैंने राधा जी से कहा—
“आप इन पत्रों की एक पुस्तक क्यों नहीं प्रकाशित करतीं?”
राधा जी ने मुस्कुराकर पूछा—
“क्या पत्रों की कोई पुस्तक निकल सकती है?”
यहीं से पत्रों को पुस्तक का रूप देने का प्रयास प्रारंभ हुआ।
राधा जी के पत्रों में प्रेम है, वियोग की पीड़ा है, घर–आँगन की बातें हैं—सुखद अनुभव हैं, शिकायतें भी हैं।
इन पत्रों में कभी राधा जी पत्नी बनकर अपने प्यार को व्यक्त करती दिखती हैं, तो कभी बहू बनकर घर–परिवार की समस्याओं का वर्णन करती हुई शिकायतें करती हैं।
कभी परिवार में घटी घटनाओं का विस्तार से वर्णन करके अपने पति को सुनाती हैं।






Antarman Ki Jharni 
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