मेरी प्रथम पुस्तक में मेरी भूमिका है
जिसे आपके सम्मुख रख रहा हूँ। इसमें मैंने नवयुवकों के समक्ष अपने हृदय की बातें कहीं हैं।
एक नवयुवक होने के नाते मैंने इसमें नवयुवकों की हैसियत और हालत रखने का प्रयास किया है। यह संभव है कि कुछ पाठक इससे असहमत हों, पर ऐसा भी नहीं कि सभी असहमत हों।
वर्तमान समय में राष्ट्र के निर्माण में नवयुवकों का योगदान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। कुछ नवयुवक दिशा से भटक जाते हैं तो कुछ अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ रहते हैं। पर यह भी सत्य है कि जहाँ प्रेम होता है वहाँ विरोधाभास की स्थिति भी रहती है।
एक कोशिश है आपके सम्मुख कुछ दिशाओं में आपके हृदय की बात उठाने की।
प्रयास किया है कि उस पुस्तक में कविताओं का संकलन सहेज कर रखा जाए। फिर भी अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूँ।
Hindi Poems by Sri Aditya JI





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