प्यार हलचल है आँखों से जानें
आँखों से पान भी पी लें आँखें
प्यार का प्रवेश भी आँखों से तमाम न्याजों से पिया-पिलाया है, लेकिन आँखों से प्यास बुझा लेना ही पर्याप्त दिया हुआ है। ऐसा अपनापन वह प्रेम में करता है। प्रेम में आँखों का हलचल बहुत सुन्दर है। एक तो विशेषण-विशेष्य का अंतर मिटा देता है। आँखें ही आँखों की प्यास हैं और आँखें ही आँखों की प्यास बुझा देती हैं। इसीलिए इन आँखों की हलचल से ही प्रेम का सर्वोत्तम आदान-प्रदान होता है। कवि ने भी यह कहकर बहुत सुन्दर भाव दिया है कि प्यार हलचल है आँखों से जानें, आँखों से पान भी पी लें आँखें—
मन कभी ही पुकारें बन सहारा पंखे
मन कभी ही मुस्कुराए पंखे
कैसे आश्चर्य से कवि ने अपने मन को जान लिया कि वह पंखे के सहारे है, आसमान नीचे है इस पर अचरज करता है—
इश्क़ में जो रखम-रखाई आफ़तें
रोज़ सुलगता रहा बचा वही
और इश्क़ बचा रहा तो सौ आफ़तों से बुझाकर-मेघुलाकर रही समझता है।
एक नयी है इब्तिदा रखे
प्यार का नाम बना रखा करे
और आश्चर्य यह, कि प्रेमिका ही कहती है कि सौ आफ़तें बचाकर, पंखे बनाकर वही साथ रखता रहा और प्रेम का नाम बना रखा करे। कवि की गजलें यही गवाही देती हैं कि गजल का आधार प्रेम है—
इश्क़ पर नाम बना रखा है
शेर पर गवाहों ने हस्ताक्षर किए
इश्क़-ग़ज़ल की एकरूपता का प्रमाण शेर ही बता चुके हैं कि इन गवाहों के हस्ताक्षर ही हैं। इसीलिए गजलें गवाह बन गई हैं। इस प्रकार कवि ने प्रेम और इश्क़ को ग़ज़ल का मूल आधार मानकर उसकी स्थायी प्रासंगिकता सिद्ध की है।
Chhand Poetry by Sunita Jain






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