“गाँधी और मेकोहारी”
इस पुस्तक के प्रत्येक आलेख में सामाजिक संरचनाओं के विविध अनुभव और महत्वपूर्ण तथ्य समाहित हैं।
आज के परिवेश में संयम और धैर्य की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही यह प्रतिदिन कम होती जा रही है। ऐसे में मेकोहारी और गाँधी का जीवन ही प्रेरणास्रोत हो सकता है।
मेकोहारी का जीवन सत्य, साधु–सद्गुणों से परिपूर्ण था। वैराग्य, शांति, प्रेम, दया, निस्पृहता, ब्रह्मचर्य और हर बाधा से स्वयं को दूर रखना तथा उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर होना इसका आधार था। गाँधी जी ने अपने जीवन में इन्हीं सद्गुणों को अपनाया और एक ऐसा जीवन जिया जो अनुकरणीय रहा।
व्यक्ति जन्म से पवित्र नहीं होता, व्यक्ति जन्म से मेकोहारी नहीं होता, और न ही व्यक्ति जन्म से गाँधी होता है।
व्यक्ति के कर्म, उसकी प्रतिबद्धता, उसकी सामाजिक उपयोगिता और उसके आदर्श ही उसे सुनिश्चित महान जीवन प्रदान करते हैं।
इस पुस्तक में समाज से लेकर परिवार के विघटन तक को सजीव उदाहरणों के साथ समझाया गया है। साथ ही आँकड़े भी दिए गए हैं जो समाज में विघटनकारी कारणों को समझने में सहायक सिद्ध होते हैं।






Anant Ki Or
Aitbaar-E-Gazal
Antarman Ki Jharni 
Reviews
There are no reviews yet.