Orkut किस-किस को याद है , या याद आ रहा है ……… आज अचानक कुछ पुरानी स्मृतियाँ सामने आ गयी उसमे कुछ स्क्रीन शॉट भी थे , तो एक झटके में ऑरकुट से लेकर आज whatsapp, Insta, twitter तक का सफ़र याद आ गया तो सोचा आप सब के साथ भी शेयर करूँ और एक कहानी के माध्यम से आप सब के साथ शेयर करूँ |
🌐 Orkut से WhatsApp तक: मेरी डिजिटल दोस्ती और Communities का सफ़र
आज ऑरकुट खोलने पर पर एक लैटर मिलता है 300 मिलयन लोगों की Communitiy
आप भी देख सकते हैं
https://orkut.com/


जिन-जिन को वो दौर याद है जब सोशल मीडिया शब्द ही नहीं था इसका सीधा उच्चारण orkut होता था | आज जब मैं WhatsApp खोलता हूँ और एक ही दिन में हज़ारों messages देख लेता हूँ, तो मन अचानक उस दौर में चला जाता है जब internet नया-नया था, mobile data महंगा था और social media का नाम लेते ही Orkut याद आता था।
यह कहानी सिर्फ technology की नहीं है, बल्कि उस journey की है जिसने हम सबको digital दुनिया से जोड़ा और communication की परिभाषा ही बदल दी।
📖 Orkut का सुनहरा दौर (2005–2010)
उस समय internet café culture जोरों पर था। ज्यादातर लोग cyber café में जाकर Orkut चलाते थे। broadband connections बहुत rare थे और घरों में internet luxury समझा जाता था।
- Orkut पर profile visitors counter देखकर लगता था जैसे popularity meter चल रहा हो। कई communities में शामिल हुए कई बनायीं , उनका रंग और मज़ा आज के दौर से कुछ अलग था , मैं ये तो नहीं कहूंगा कि वो दौर अच्छा था ये दौर ठीक नहीं है जैसा लोग अमूमन कहते हैं , पर इतना जरुर कहूँगा वो दौर भी सुखद था
- कोई DP बदलते ही comments की बौछार होती: “Nice pic bro”, “Cool buddy”, “Wow yaar”।
- Testimonials लिखना और पाना उस समय friendship proof जैसा था।
🎯 Communities – जहाँ असली गदर मचता था Orkut to Whats App
अगर Orkut का दिल पूछा जाए तो वो था उसकी communities।
- Shayari communities में लोग अपना दिल हल्का करते थे। यही से डिस्टेंस प्रेम , अर्थात Distance Love की शायद शुरुवात भी digital media से हुई | पहले भी हुआ करते होंगे पर इन संबंधों कि संख्या अचानक से वृद्धि कि और अग्रसर हुई
- Jokes communities में हर दिन नई हंसी का dose मिलता। क्या जोक्स आते थी आते ही फॉरवर्ड करने का मन करने लगता था
- Tech communities में लोग mobile hacks और नए software share करते।, इसमें ऐसी नई – नई ट्रिक्स ज्ञात होती थी कि लगता है बस मानो जादू हो गया हो |
- Political communities में ऐसे debates होते जैसे mini-parliament। बाप रे बाप क्या झगड़ा बात यहाँ तक आ जाती है कि एड्रेस बताओ आकर निपट लेते हैं , गज़ब दुनिया का अजब दौर शुरू हुआ था |
मैंने खुद कई communities में इतना वक्त गुज़ारा कि लगता था यही मेरी असली दुनिया है। नए दोस्त बनाना, scraps exchange करना और कभी-कभी रात भर जागकर comments करना – सब कुछ वहीं चलता था।
आज कल एक शब्द नई पीढ़ी के बीच चला है dm कर देना | तब इस शब्द का नाम स्क्रैप हुआ करता था |
💰 उस दौर में Social Media नि:स्वार्थ था तब पैसा नहीं था ?
आज सोचता हूँ तो सबसे बड़ी कमी यही थी कि उस समय पैसा नहीं था।
- लाखों members वाली communities भी free चलती थीं।
- Google AdSense और affiliate marketing जैसी चीज़ें हम जानते भी नहीं थे।
- Digital दुनिया उस समय सिर्फ़ fun और connection का जरिया थी।
आज अगर Orkut communities होतीं तो हर एक community एक-एक digital empire होती।
📱 Nokia E-Series और WhatsApp का जन्म (2010–2012)
धीरे-धीरे Orkut की popularity घटने लगी और Facebook ने जोर पकड़ लिया।
फेसबुक ने भी बहुत दिन तक अपना UI नहीं बदला , तब तक इसको जनता ने घास नहीं डाली , लेकिन जैसे ही फेसबुक ने , अपना ui बदला , लोगों कि भीड़ लग गयी और जो ऑरकुट पर होता वो सब यहाँ होने लगा वहां की communities यहाँ ग्रुप में बदल गयी और यहाँ एक नयी बात का जन्म हुआ फेसबुक पेज | और उसके बाद का दौर लगभग बहुत तेजी से २-३ वर्ष में ही फेसबुक सोशल मीडिया का पर्याय बन गया |

इसी बीच आया WhatsApp, जो उस समय एक छोटा-सा app था।

मुझे याद आता है कि मेरे पास उस वक्त दो फ़ोन हुआ करते थे Nokia E-series का phone था – Nokia E-90 Communicator। और दूसरा E-80 exact याद नहीं आ रहा मॉडल नंबर लेकिन वाइट कलर का ई सीरीज ही था
इन पर उस दौरान 2007-2011 तक सोशल मीडिया अप्प्स का उपयोग करना अपने आप में ही आज रोमांचक सा लगता है
ब्लैक बेरी सर्विसेज फ़ोन में होना एक सामाजिक उत्कृष्टता का एक मानक था |
WhatsApp install करना ही अपने आप में struggle था:
- पहले app डाउनलोड करना → फिर install करना → फिर manually settings set करना।
- Data packs महंगे और छोटे होते – ₹30 में 30 MB data।
- Speed सिर्फ़ 2G EDGE थी लेकिन WhatsApp फिर भी messages भेज देता था।
💡 WhatsApp की खासियत
WhatsApp की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि –
👉 “कोई ID नहीं, कोई password नहीं, सिर्फ phone number।”
उस समय जब हर messenger अलग ID मांगता था (Yahoo, MSN, GTalk), WhatsApp ने सब आसान कर दिया। यही simplicity उसे धीरे-धीरे राजा बना गई।
🚀 Competitors का दौर
WhatsApp अकेला player नहीं था।
उस समय market में कई apps धमाल मचा रहे थे:
- Nimbuzz (Rocket app) – Yahoo, MSN, GTalk सब एक जगह।
- Fring – Video call की सुविधा देने वाला पहला Symbian app।
- eBuddy – Browser version से भी chat चलता था।
- Mig33 और Palringo – Chat rooms + online games का मज़ा।
मैंने खुद कई बार Nimbuzz और Fring पर रातें बिताई हैं, लेकिन अंत में सब apps गायब हो गए। कारण simple था – WhatsApp सबसे आसान था।
💬 WhatsApp का असली धमाका (2013–आज तक)
2012–13 आते-आते WhatsApp mass adoption तक पहुँच गया।
अब हर phone में WhatsApp होना अनिवार्य था।
- Family groups, friends groups और office groups बनने लगे।
- Broadcast lists ने लोगों को mass messaging का नया तरीका दिया।
- Telecom कंपनियों की SMS service practically खत्म हो गई।
मैं उस समय दिन में 15–16 हज़ार messages receive करता था – mostly groups में।
आज भी 3–4 हज़ार messages daily आते हैं। WhatsApp मेरे लिए communication का नहीं बल्कि lifestyle का हिस्सा बन चुका है।
🏆 WhatsApp का Evolution
- Text → Images → Audio Notes
- Voice Calls और Video Calls
- Status feature (Snapchat से inspired लेकिन hit हुआ)
- Payments और Channels
हर step पर WhatsApp ने खुद को upgrade किया।
❤️ Digital दोस्ती और रिश्तों का सफ़र
जब मैं पीछे देखता हूँ तो लगता है –
- Orkut ने हमें digital दोस्ती और communities का पहला lesson दिया।
- Yahoo, MSN, Nimbuzz, Fring ने हमें online chat culture सिखाया।
- WhatsApp ने हमें real-time connection का comfort दिया।
आज मैं automation tools और broadcast lists तक use करता हूँ, लेकिन कहीं न कहीं दिल अब भी Orkut के scraps और communities को याद करता है।
🔮 Digital दुनिया का Lesson
- Orkut nostalgia है – उस समय दोस्ती का symbol।
- WhatsApp आज की ज़िंदगी है – communication का आधार।
- और सबसे बड़ी बात → हमने tech की पूरी transition देखी:
- Cyber café से Orkut तक।
- Nokia E-series से WhatsApp तक।
- Communities से groups तक।
अब तो दौर ही बदल रहा है आगे न जाने क्या होगा , भविष्य के गर्भ से कौन सा अंकुर फूटेगा राम जाने
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